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उज्जैन: अवैध क्लिनिक में फर्जी डॉक्टर ने कराई डिलीवरी, नवजात की मौत; आरोपी फरार, स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई कर अवैध क्लिनिक किया सील
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया, जब एक फर्जी महिला डॉक्टर ने बिना किसी योग्यता के अवैध रूप से प्रसूता की डिलीवरी कराई, जिसके चलते नवजात शिशु की दर्दनाक मौत हो गई। मामले के उजागर होते ही अवैध क्लिनिक संचालिका तैयबा शेख और दलाल महिला माया मालवीय मौके से फरार हो गईं।
घटना उज्जैन के पांड्याखेड़ी इलाके की है, जहां बिना लाइसेंस वाले अवैध क्लिनिक में इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ किया जा रहा था। सदावल निवासी संजू मालवीय की गर्भवती पत्नी को उनकी सास श्यामू बाई सरकारी चरक अस्पताल लेकर पहुंची थीं। इसी दौरान अस्पताल के बाहर खड़ी एक दलाल महिला, माया मालवीय, ने उन्हें झांसे में ले लिया।
माया ने परिजनों को विश्वास दिलाया कि सरकारी अस्पताल में भर्ती होने की झंझट के बजाय एक प्राइवेट क्लिनिक में सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी करवा सकती है। परिवार उसकी बातों में आ गया और पांड्याखेड़ी स्थित तैयबा शेख के अवैध क्लिनिक में महिला को ले जाया गया।
यहां, बिना किसी डिग्री, बिना किसी अनुभव और बिना किसी लाइसेंस के तैयबा शेख ने 10 हजार रुपये लेकर डिलीवरी शुरू कर दी। लेकिन यह डिलीवरी एक भयानक हादसे में तब्दील हो गई। डिलीवरी के दौरान ही नवजात की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन फर्जी डॉक्टर तैयबा शेख ने न ही उचित इलाज किया और न ही कोई डॉक्टर को बुलाया। जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई तो डिलीवरी को सफल बताकर नवजात को आईसीयू में भर्ती करने के बहाने चरक अस्पताल भेज दिया गया।
जैसे ही नवजात को अस्पताल पहुंचाया गया, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और जब परिजनों ने फर्जी क्लिनिक वालों से संपर्क करना चाहा, तो दलाल माया और तैयबा शेख, दोनों ने अपने फोन बंद कर दिए और फरार हो गईं।
नवजात की मौत से गुस्साए परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को इस घिनौनी घटना की जानकारी दी। डॉ. विक्रम रघुवंशी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी कर क्लिनिक की जांच की।
जांच में पाया गया कि—
✅ क्लिनिक के पास कोई लाइसेंस नहीं था।
✅ तैयबा शेख के पास किसी भी तरह की मेडिकल योग्यता नहीं थी।
✅ अस्पताल में डिलीवरी कराने के लिए जरूरी उपकरण और सुविधाएं नहीं थीं।
इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग ने अवैध क्लिनिक को सील कर दिया और पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।